सारे रावण, मेघनाथ और कुंभकरणों ने अयोध्या पर कब्जा कर लिया है, अयोध्या नगरी और विशेषतः श्री रामजन्मभूमि तीर्थ स्थल बेईमानों, धोखेबाजों, खुदगर्जों, चोरों, डकैतों , भृष्टों और व्यभिचारियों का अड्डा बनकर रह गया है और इसमें आश्चर्य की बात भी क्या है ? जब हमारा लोकधर्म ( वैदिक धर्म नहीं ) कामनाओं पर ही तो आधारित है तो श्री राम जन्म भूमि मंदिर के पुजारियों ने , रक्षकों ने क्या अपनी कामनाओं पर लंगोट बांध रखी है ? क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने प्रभु श्री राम के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य और मर्यादित जीवन जीने की कसमें खा रखी हैं ?
गलती बेईमान पुजारियों और मंदिर की कमान सम्हाले हिंदुओं की नहीं हैं ! क्या आम हिंदू श्रद्धालु श्री राम जन्मभूमि मंदिर इसलिए जाता है कि वो श्रीराम के जीवन के त्याग भरे जीवन से प्रभावित है या श्री राम उसके आदर्श हैं ? बिलकुल नहीं, धार्मिक पाखंड से भरा श्रद्धालु वहां जाता है अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिए, उसको लगता है कि जिस प्रभु श्री राम ने अपने जीवन में किसी भी कामना, लालच, स्वार्थ की परवाह नहीं की , वो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम पाखंडियों, लालचियों की असहज सांसारिक कामनाओं की पूर्ति कर देंगे ?
मुगलों में और हम में क्या फर्क रह गया है ? मुगल काफ़िरों ( अविश्वासी ) के मंदिरों को धन संपदा के लिये लूटते थे और हम हिंदू धर्म के लुटेरे, सनातनी श्रद्धालुओं के विश्वास को धर्म के नाम लूट रहे हैं ? हिंदुस्तान अध्यात्मिक देश है, हमारे वेदों में कर्मकांड भी है और ज्ञानकांड भी है , कर्म कांड में प्रकृति की पूजा को महत्व दिया गया है क्योंकि उस समय कृषि ही जीवनोपार्जन का मुख्य स्त्रोत था और उस समय की ऋषियों ने संतो ने अनेकों उपनिषद, भगवद्गीता, अष्टावक्र गीता जैसे अनेकों ज्ञान साहित्य की रचना की लेकिन धर्म के ठेकेदारों ने अध्यात्मिक ज्ञान को परे कर दिया और धन लोलुप लोगों ने हिंदू धर्म को ऐसा विकृत कर दिया है कि अब हमारा धर्म लालच, कामनाओं, पाखंड का पर्याय बन कर रह गया है !
यही कारण है कि रामचरितमानस, गोस्वामी तुलसीदास रचित एक कहानियों, किस्सों या घटनाओं की किताब मात्र रह गयी है, हर घर में रामचरितमानस मिल जायेगी लेकिन समझना कोई नहीं चाहता I ऐसे ही श्री कृष्ण की भगवद्गीता कोई नहीं पढ़ना चाहता क्योंकि धर्म के पैरोकारों ने महाभारत को घर में ना रखने का संदेश प्रचारित कर दिया है I जिस प्रभु श्री राम के जीवन से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन की बेचैनी को, अशांति को, अधीरता को, लालच को, कामनाओं को और तनाव को दूर कर सकते हैं और जीवन में धैर्य, मर्यादा, शांति , प्रेम, ईमानदारी, सत्य का प्रवाह कर सकते हैं लेकिन हमने उसी प्रभु श्री राम जन्म भूमि मंदिर को बेईमानी का अड्डा बना कर रख दिया है I
प्रभु श्री राम क्यों पसंद आयेंगे आज हमको ? आज के समय में वो सब जो तुम्हारा नहीं है, तुमने अर्जित भी ना किया हो, तुम उसको भी जबरदस्ती, छल कपट से पाने की कोशिश करते हो , वहीं श्री राम तो हासिल की हुई चीज को छोड़ देते हैं तो आज श्रीराम क्यों पसंद आयेंगे हमको ? आज के इस भोग के युग में ऐसा व्यक्ति क्यों पसंद आयेगा आपको , जिसका जीवन त्याग और मर्यादा पर केंद्रित रहा हो I
राम वो हैं जिन्होंने कभी व्यक्तिगत सुख की आकांक्षा नहीं रखी, राम वो हैं जिन्होंने पूरी जान लगा दी एक ऊंचे उद्दैश्य के लिए और जब जीत ली सोने की लंका तो विभीषण के हवाले कर दी और आज के समय में तो 2 ग्राम सोने के लिये भाई ही भाई की हत्या कर दे ? आज क्यों पसंद आयेंगे राम हमको ?
नमस्कार
राजेंद्र सोनी
संपादक, लेखक, चिंतक
मुक्ति की उड़ान
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भोपाल
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