भाजपा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सादगी इतनी स्वाभाविक है कि महसूस ही नहीं होता कि वे मध्य प्रदेश भाजपा संगठन के अध्यक्ष पद पर विराजमान हैं, साधारण सा पेंट – शर्ट, सहज स्वभाव, भाषा में नम्रता, चाल में सरलता, अहंकार विहीन व्यक्तित्व, नाम मात्र का भी दिखावा नहीं I इसके उलट जैसे नई नवेली दुल्हन सिंदूर और चूड़ियाँ खनकाती हुई, इतराती हुई घूमती हैं वैसे ही आजकल के छुठभइये अंकुरित होते नेताओं को देखिये , गले में सोने की माला, कलाइयों में रंग बिरंगा कलावा, माथे पर टीका , चमचों की फौज, बड़ी सी गाड़ी में अवैद्य रूप से लगे सायरन और गाड़ी की छत पर दो गेंदे की माला डाल के भौकाल मचाते नौसिखिया नेताओं को हेमंत खंडेलवाल जी की सादगी और सौम्यता से सीखने की जरूरत है I
नेता तो ‘ वो ‘ होता है जो ‘ वो ‘ होता नहीं है उससे ज्यादा होने का दिखावा करता है लेकिन हेमंत खंडेलवाल वो शख्सियत हैं जो ‘ वो ‘ हैं उसका भी प्रदर्शन नहीं करते हैं , वो ऐसे विलक्षण व्यक्तित्व हैं जो मिलने वालों को सोफे पे बैठाते हैं और खुद चारपाई या साधारण सी कुर्सी पर बैठ जाते हैं , इसके विपरीत आप किसी भी नेता के घर जाइयेगा, जहां नेता जी आम जनता से मुलाकात करते हैं, तो देखियेगा नेता जी का विशेष गद्देदार सोफा लगा होता है जिसमें सफेद रंग का टॉवेल चढ़ा होता है जैसे किसी बादशाह का सिंहासन हो और प्लास्टिक की कुर्सियों में गरीब – पीड़ित जनता जैसे किसी राजा से दया की भीख मांग रही हो ! वहां का माहौल ऐसा होता है जैसे किसी रियासत में किसी अहंकारी राजा के दरबार में आ गये हों ! नेताओं को भी हेमंत खंडेलवाल से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है I
हेमंत खंडेलवाल ना तो सरकारी गाड़ी और ना ही सरकारी बंगले का इस्तेमाल करते हैं , वो कहते है कि आर्थिक रूप से उन्हें सरकारी सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है तो वो क्यों सरकारी संसाधनों का अपव्यय करें ? और दूसरी तरफ देखिए, नेता मुफ्त सरकारी सुविधाओं का उपभोग शान से करते हैं और सरकारी आवास को जनता के टैक्स के पैसों से करोडो रुपए लगाकर चमकाते हैं, एक केंद्रीय मंत्री तो भोपाल के ‘ 74 बंगले ‘ के दो बंगलों को जोड़कर पर कब्जा जमाये हुए हैं ?
हेमंत खंडेलवाल के परिवार में एक बेटा और बेटी हैं, इसी साल मार्च के महीने उनकी बेटी का दुखद देहवसान हो गया था, उनके बेतूल के घर में शुभचिंतकों का तांता लगने लगा था तो उन्होंने सभी शुभचिंतकों से बेतूल ना आने की अपील की थी, इतना सरल जीवन जीते हैं हेमंत खंडेलवाल जी की आश्चर्य होता है कि इस आडंबरो से भरी कलयुगी दुनिया में ऐसा संत कैसे अपने आपको बचा के रखा हुआ है ? आज तो नेता किसी भी आयोजन को इवेंट बना देते हैं चाहे वो अंत्येष्टि हो या तेहरहवीं का कार्यक्रम हो, 6 महीने पहले एक केंद्रीय नेता से मध्यप्रदेश शासन में बने मंत्री जी की माता जी का देहांत हुआ था तो उनका गांव छावनी बन गया था, नेताओं का तांता लग गया था और तेहरहवीं भोज का विशाल आयोजन जिले के स्टेडियम में किया गया था जिसमें हजारों लोगों ने मृत्यु भोज का स्वाद लिया था I क्या जनसेवकों को ऐसे आडंबरों से बचना नहीं चाहिए ?
हेमंत खंडेलवाल सामाजिक जीवन में जितने सरल, सहज दिखते हैं, संगठन को मजबूत करने के प्रयास वो सख्ती से करते है, आज संगठन के सभी पदाधिकारी नियमित रूप से भाजपा कार्यालय में बैठते हैं और सामूहिक रूप से संगठन को मजबूत कर रहे हैं , जब उनको लगा कि मंत्री, विधायक अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं से दूर हो रहे हैं तो उन्होंने मंत्रियों को नियमित रूप से भाजपा कार्यालय में बैठने के लिये बाध्य किया ताकि कार्यकर्ता अपनी समस्याएं मंत्रियों को बता सकें और उसका निराकरण कर सकें I
क्या आपको मालूम है कि हेमंत खंडेलवाल के बेटे की 3 जुलाई को शादी है ? कोई दिखावा नहीं , कोई प्रपंच नहीं, कोई ढोंग नहीं, हेमंत खंडेलवाल कहते हैं कि सिर्फ 50 निकट के पारिवारिक लोग शादी में शामिल होंगे , हर नेता को हेमंत खंडेलवाल की तरह इस गरीब देश में ऐसे आदर्श प्रस्तुत करने होंगे, जाने कितने लोग शादी के दिखावे में कर्ज के दलदल में फंस जाते हैं, क्या विजयराघवगढ़ के विधायक संजय पाठक अपने अध्यक्ष से कुछ सीखेंगे जिन्होंने अपने बेटे की शादी में 100 करोड़ रुपए फूंक दिये थे ?और एक दूसरे जन जन के नेता जी ने अपने दोनों बेटों की शादी राजश्री प्रोडक्शन की ” हम साथ साथ हैं ” की तर्ज पर करी थी, एक महीने तक चली करोड़ों रुपए की दोनों बेटों शादियों की चकाचौन्ध भरी रीलों और वीडियो से पूरा सोशल मीडिया पट गया था ? क्या भारत जैसे गरीब देश में हम इन्हें जन – जन के नेता कह सकते हैं ?
हेमंत खंडेलवाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक वर्ष पूर्ण कर लिया है, इस एक वर्ष में भाजपा संगठन और बेहतर हुआ है, हेमंत खंडेलवाल के कुशल नेतृत्व में विपक्ष के लिये सत्ता की राह और कठिन प्रतीत हो रही है ?
नमस्कार
राजेंद्र सोनी
संपादक, लेखक, चिंतक
मुक्ति की उड़ान
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