आज के अखबार में लाखों रुपए का एक पूरे पृष्ठ का विज्ञापन देखा ‘ कैंसर हीलर सेंटर ‘ का उद्घाटन था और उद्घाटन कर रहे थे सनातन धर्म के गौरव, बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री I घटिया जादू दिखाकर पर्ची निकालकर चूरण से उपचार करने वाले, लोगों के अंदर बैठे आतंक मचाते भूत – प्रेत और चुड़ैलों को भगाने वाले, काबिल शोधकर्ता और वैज्ञानिक धीरेंद्र शास्त्री , चिकित्सा विज्ञान को 100 साल पहले की स्थिति में पहुंचाने वाले, जादू – टोना, अंधविश्वास, पाखंड को नई ऊचाइयाँ पर पहुंचाने वाले , मेडिकल साइंस का मजाक उड़ाने वाले , अशिक्षितों , अनपढ़ों को मूर्ख बनाकर शरीर के असाध्य रोगों का इलाज करने का दावा करने वाले श्री धीरेंद्र शास्त्री एक ‘ कैंसर उपचार केंद्र ‘ का शुभारंभ कर रहे हैं ? क्या ये पूरे चिकित्सा विज्ञान के लिये शर्म का विषय नहीं है ?
पिछले दशकों में चिकित्सा विज्ञान ने बहुत तरक्की करी है जब चिकित्सा विज्ञान नहीं था तो लोग इलाज के नाम पर सल्फर और मर्क्युरी खाकर मर जाते थे ? पेनिसिलिन नहीं थी, एंटीबायोटिक्स नहीं थी, सर्जरी जैसी कोई चीज नहीं थी, लोग पाखंडी बाबाओं के चूरण खा कर तड़प – तड़प कर मर जाते थे ? 100 साल भी नहीं हुए, 1947 में आजादी के समय भारत देश की मृत्यु दर 25 वर्ष थी … जी हां 25 साल ! आज 70 वर्ष है ! सही पढ़ा आपने 70 साल ! 1947 में शिशु मृत्यु दर 25% थी और आज 2 – 3% है ! पहले हैजा / प्लेग से गांव के गांव उजड़ जाते थे लेकिन आज इसका कोई असर नहीं होता ! ये सब झाड़ – फूंक, जादू – टोना, अंधविश्वास, चमत्कार से नहीं हुआ है, इसका श्रेय जाता है विज्ञान और विज्ञानिकों को , जिन्होंने अपने शोध से करोडो – अरबों लोगों की जान बचाई है I
आज एक कथित चिकित्सा केंद्र एक अशिक्षित बाबा को जन – जन का प्रेरणास्रोत बताकर अशिक्षा और अंधविश्वास का महिमामंडन नहीं कर रहा है तो क्या कर रहा है ? भारत में जब तक अशिक्षा और पाखंड है , तब तक वैज्ञानिकों की उपेक्षा और मूर्खों का वर्चस्व कायम रहेगा ! तब तक ये देश पिछड़ा ही रहेगा, चारों तरफ गंदगी का सम्राज्य, बेईमानी, ठगी, भृष्टाचार, पाखंड, अनपढ़ता, मूर्खता भारत की पहचान बन गया है , भारत जाहिलों का देश बन कर रह गया है और जो साक्षर हैं, बुद्धिजीवी हैं, वैज्ञानिक हैं ,शिक्षाविद् हैं, वो भी मूक दर्शक बने हुए हैं क्योंकि वो जाहिलों से डरे हुए हैं , कारण है कि वो ही तो ऊँची गद्दियों पर विराजमान हैं ? पिछले 1 – 2 दशकों में ज्ञान का पतन जितना भारत में हुआ है दुनिया में कहीं नहीं हुआ, आज हालात ये हैं कि दुनिया की टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है याने जो पढ़ भी रहे हैं वो भी जरूरी नहीं कि जाहिल और मूर्ख ना निकलें ?
मैं पहले पशोपेश में था कि ये ” कैंसर हीलर सेंटर ” क्या होता है ? क्या ये अध्यात्मिक केंद्र है या इसका आधार वैज्ञानिक है ? लेकिन जब मैने उद्घाटनकर्ता का नाम देखा तो मैं समझ गया कि इस ये संस्थान ” हीलर ” नहीं ” डीलर ” है, इनके कर्ता – धर्ताओं को मूढ़ भक्त चाहिए जो कुछ पूछे नहीं ? बस लुटता और लुटाता रहे, मूर्खताओं को बिना जिज्ञासा किये अपनाता रहे और मूर्खो की असलियत बिना समझे सर पर बैठाता रहे ? मन की बीमारी हो तो उसका अध्यात्म से इलाज किया जा सकता है लेकिन शरीर की बीमारी का इलाज तो जगत में ही मिलेगा, जगत याने विज्ञान .. किसी चिकित्सक ( Healer) का रूप धरे हुए पाखंडी बाबा से बचकर रहना , चाहे वो आश्रम में बैठा हो या चिकित्सा केंद्र में ?
नमस्कार
राजेंद्र सोनी
संपादक, लेखक, चिंतक
मुक्ति की उड़ान
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